Sunday, May 18, 2014


!!!!!!!! कैसी यह बेबसी !!!!!!!!


देख कर तुमको न जाने क्यों, यह लगता है अक्सर

शायद कुछ कहना चाहती थीं, तुम मुझसे मिलकर


नयनों की यह भाषा मुझे, क्यों न सिखायी तुमने

शायद मैं तुम को समझ पाता, हर घडी हर पहर


ना तुम्हारा कुछ कहना, और ना मेरा कुछ सुनना

न पास आ सके हम, न बन सके कभी हमसफर


बस एक खुशबू के साथ, कब तक टिकता यह रिश्ता

जो छोड गयी मजधार मैं, हमसे कई बार मिलकर


किधर कैसे और कहां तलाश करूं, कितना तलाश करूं

हर तरफ बस वही खुशबू, आज जैसे तू हो गयी अमर

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